" जिधर देखता हू वही मेरे राम हैं,
मन को तो मिलता सहज ही विराम है,
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द्वैत का जो अंत हो गया ,
रोम -रोम संत हो गय….प्रेम जब अनंत हो गया। ....
" प्रेम जब अनन्त हो गया, रोम-रोम संत हो गया,
देवालय बन गया बदन, ह्रदय महंत हो गया ॥"
जय सिया राम। ...
जय श्री राम
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